अहिंसावादी पार्टी का संविधान एवं नियम

अहिंसावादी पार्टी 

अहिंसावादी पार्टी विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति तथा समाजवाद, पंथ-निरपेक्षता और लोकतंत्र के सिद्धांतों के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखेगा तथा भारत की प्रभुता, एकता व अखंडता को अक्षुण्ण रखेगा।

धारा 1 – पार्टी का नाम – ‘‘अहिंसावादी पार्टी” होगा जिसको संविधान में “पार्टी” के नाम से सम्बोधित किया जायेगा।

धारा 2 – पार्टी का कार्यक्षेत्र – सम्पूर्ण भारत रहेगा।

धारा 3- उद्देश्य – पार्टी एक ऐसे भारत के निर्माण के लिए प्रतिज्ञाबद्ध है जो अहिंसा के पथ पर चलते हुए भारतीय संस्कृति के अनुरूप स्वदेशी उत्पाद को बढ़ावा देते हुए भारत से बेरोजगारी एवं गरिबी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए ‘‘हर घर उद्योग, हर हाथ रोजगार” के लिए प्रयासरत एवं भारत देश भ्रष्टाचार रहित सुदृढ़, समृद्ध एवं स्वावलम्बी देश बने जिसका दृष्टिकोण जनतंत्र के हितार्थ सतत विकास की ओर प्रगतिशील एवं प्रबुद्ध हो। अपनी प्राचीन ऐतिहासिक भारतीय संस्कृति व सभ्यता के रक्षार्थ एवं विश्व शांति के साथ न्याययुक्त संयुक्त राष्ट्र व्यवस्था को स्थापित करने में विश्वस्तर पर अपनी प्रभावशाली छवि स्थापित करने वाला राष्ट्र बने। पार्टी का लक्ष्य जनतंत्र के हितार्थ में जाति, संप्रदाय लिंग भेद-भाव रहित भारत की अखंडता को कायम रखते हुए लोकतंत्र के सिद्धांतों के प्रति सच्ची आस्था और निष्ठा के साथ अहिंसा पथ पर भारत के समस्त नागरिको को राजनीतिक, सामाजिक आर्थिक न्याय समान अवसर में उपलब्ध करवाते हुए अभिव्यक्ति एवं अध्यात्म के प्रति निष्ठा की स्वतंत्रता के लिए पार्टी सदैव समर्पित रहेगी।

धारा 4 – पार्टी का मूल दर्शन – “अहिंसावाद” होगा।

धारा 5- निष्ठा – पार्टी भारतीय न्याय व्यवस्था द्वारा प्रतिष्ठापित भारतीय संविधान और समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र के सिद्धांतो के प्रति सच्ची निष्ठा रखती है और भारत की संप्रभुता, एकता की सुरक्षा के प्रति समर्पण के साथ ही अहिंसावादी दृष्टिकोण से शोषणमुक्त एवं कुनीतियों रहित संयुक्त समाज की स्थापना के साथ ही सर्वधर्मसमान पर विश्वास रखती है।

धारा 6- झंडा – पार्टी का झंडापार्टी का झंडा “केशरिया एवं सफ़ेद रंग का होगा जिसमे केशरिया रंग ४०% बीच में सफ़ेद २०% एवं पुनः केशरिया ४०% की दर से रहेगा” जो की तिरछे में रहेगा। वहीँ चुनाव आयोग द्वारा आवंटित चुनाव चिन्ह को आवंटन के पश्चात् झंडे के बिच में प्रदर्शित किया जायेगा. व जब तक चुनाव चिन्ह आवंटित नहीं होता है तब तक झंडा बिना चुनाव चिन्ह के ही उपयोग में लाया जायेगा.
धारा 7- चुनाव चिन्ह – चुनाव आयोग द्वारा आवंटन के समय निर्धारित किया जायेगा।
धारा 8- अंग – पार्टी के पूर्ण अधिवेशन तथा विशेष अधिवेशन सहित निम्नलिखित अंग होंगेः-
8(1)- अहिंसावादी पार्टी मुख्य राष्ट्रीय कार्यकारणी
8(2)- राष्ट्रीय परिषद्
8(3)- कार्य समिति
8(4)- प्रदेश अहिंसावादी पार्टी कमेटी
8(5)- प्रदेश परिषद्
8(6)- जिला / शहर अहिंसावादी पार्टी कमेटी
8(7)- जिला अहिंसावादी पार्टी कमेटी की मण्डल कमेटियां जैसे ब्लाक या निर्वाचन क्षेत्र अहिंसावादी पार्टी कमेटी तथा अन्य मण्डल कमेटियां जो कि संबंधित प्रदेश पार्टी कमेटी द्वारा निर्धारित की जाएंगी।
नोट- इस संविधान में जहां कहीं ‘प्रदेश’ शब्द प्रयोग होने पर उसमें ‘क्षेत्रीय’ एवं जहां कहीं ‘जिला’ शब्द प्रयोग होगा उसमें ‘शहर’ भी आवश्यकतानुसार शामिल होंगे।
धारा- 8(5) के अन्तर्गत नियम :
जिला पार्टी कमेटी – प्रदेश पार्टी कमेटी को कार्य समिति की पूर्व स्वीकृति प्राप्त करने पर पांच लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में पार्टी कमेटियां गठित करने का अधिकार होगा। इस प्रकार गठित पार्टी कमेटी को जिला कमेटी का दर्जा हासिल होगा।

धारा 9- राज्य एवं क्षेत्र
(क) प्रदेश पार्टी कमेटीयां साधारणतः नीचे लिखे गए प्रदेशो में बनाई जाएंगी जिनके प्रदेश मुख्यालयों के स्थान उनके नाम के सामने दिये गये हैं:-

प्रदेश                       मुख्यालय
1. आंध्र प्रदेश                विजयवाड़ा
2. अरुणाचल प्रदेश         इटानगर
3. असम                        गोहाटी
4. बिहार                        पटना
5. छतीसगढ़                  रायपुर
6. दिल्ली                       दिल्ली
7. गोवा                        पणजी
8. गुजरात                      अहमदाबाद
9. हरियाणा                    चंडीगढ़
10. हिमाचल                  शिमला
11. जम्मू-कश्मीर           श्रीनगर
12. झारखण्ड                 रांची
13. कर्नाटक                   बेंगलूर
14. केरल                       तिरूवनंतपुरम
15. मध्य प्रदेश               भोपाल
16. महाराष्ट्र                  मुम्बई
17. मणिपुर                    इम्फाल
18. मिजोरम                   एजल
19. मेघालय                   शिलांग
20. नागालैंड                  कोहिमा
21. उड़ीसा                       भुवनेश्वर
22. पांडुचेरी                    पांडुचेरी 
23. पंजाब                       चंडीगढ़
24. राजस्थान                 जयपुर
25. सिक्किम                  गंगटोक
26. तमिलनाडु                चैन्नई
27. त्रिपुरा                       अगरतला
28. तेलंगाना                   हैदराबाद
29 उत्तराखंड                  देहरादून
30. उत्तर प्रदेश               लखनऊ
31. पश्चिम बंगाल           कोलकाता
(ख) निम्नलिखित क्षेत्रों में क्षेत्रीय पार्टी कमेटीयां बनाई जाएंगी जिनके मुख्यालयों का स्थान उनके नाम के सामने दिया गया हैः-
क्षेत्र                         मुख्यालय
1. अंडमान-निकोबार             द्वीप समूह पोर्ट ब्लेयर
2. चंडीगढ़                    चंडीगढ़
3. दादरा-नगर                  हवेली सेलवासा
4. दमन-दीव                    मोती दमन
5. लक्षद्वीप                   कावारती
(ग) प्रदेश पार्टी कमेटी, कार्य समिति से पूर्व मंजूरी लेकर अपने मुख्यालय का स्थान बदल सकेगी।(घ) कार्य समिति प्रदेश पार्टी कमेटी अथवा संबंधित कमेटियों की सलाह जानकर किसी एक नए प्रदेश पार्टी का गठन कर सकती है, किसी मौजूदा प्रदेश पार्टी को खत्म कर सकती है, किन्ही मौजूदा प्रदेशो को मिलाकर एक प्रदेश पार्टी बना सकती है। किसी एक प्रदेश के जिम्मे किसी अन्य प्रदेश के एक जिले, या उसके एक अथवा अनेक हिस्सों को सौंप सकती है।
(ङ) कार्य समिति को भारत संघ के किन्हीं ऐसे इलाकों को जिन्हें किसी प्रदेश पार्टी कमेटी में प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया हो, जिस ढंग से भी वह उचित समझे उसी ढंग से प्रतिनिधित्व देने या इस प्रकार के किसी इलाके को अथवा उसके हिस्से को पड़ोस के प्रदेश या क्षेत्र में मिलाने का आदेश देने का अधिकार होगा।

धारा 10- सदस्यता
1- सदस्यता के नियम
(क) 1- 18 वर्ष या अधिक आयु का कोई भी व्यक्ति जो धारा-3, 4, 5 में आस्था रखता हो, सदस्यता फार्म पर लिखित घोषणा करने पर और केवल 500 रुपया मात्र छः वर्षिय चंदा देने पर पार्टी का सदस्य बन सकेगा, बशर्ते कि वह किसी अन्य राजनीतिक, साम्प्रदायिक अथवा किसी और दल का सदस्य न हो जिसका पृथक संविधान, पृथक सदस्यता और पृथक कार्यक्रम हो।
(क) 2- एक ही व्यक्ति एक से अधिक स्थान से सदस्यता ग्रहण नहीं कर सकेगा।
(क) 3- सदस्यता काल सदस्यता ग्रहण करने की तिथि से आगामी छटवे वर्ष के प्रवेश दिनांक से एक दिन पूर्व कि रहेगी (जैसे 02 मार्च 2020 को सदस्यता लिया गया है तो 01 मार्च 2026 तक सदस्यता निरंतर रहेगी) एवं आगामी रूप से पुनः फार्म भर कर सदस्यता ग्रहण करना होगा। सदस्यता काल के बीच यदि मृत्यु- निष्काशन – त्याग पत्र जैसी घटना घटती है तो पार्टी से सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाएगी।
(क) 4- पार्टी की सदस्यता हेतु सदस्य को सदस्यता फॉर्म भरकर निकटतम स्थानीय / जिला एवं प्रदेश कार्यालय को देना अनिवार्य रहेगा। जिसकी प्रविष्ठियां सम्बंधित कार्यलय को रखना अनिवार्य रहेगा।
(क) 5- सदस्यता का नवीनीकरण आवश्यक सदस्यता शुल्क जमा करने से पूरा हुआ माना जाएगा।
1- (क) (अ) (1) पार्टी कमेटी के किसी भी समिति के प्रतिनिधि या पदाधिकारी के रूप में निर्वाचित होने के लिये केवल वही व्यक्ति योग्य समझा जायेगा जो कम से कम तीन वर्षो तक पार्टी का सदस्य रहा है (प्रथम बार के गठन को छोड़ कर प्रथम बार का गठन समिति सदस्यों की अनुशंसा पर राष्ट्रीय अध्यक्ष के आदेशानुसार से किया जायेगा)
1- (क) (अ) (2) कोई भी सदस्य जो पार्टी कमेटी का प्रतिनिधि या पदाधिकारी बनना चाहता है वह 5000/- रू0 की धनराशि जमा करेगा तभी सदस्यता के लिए समिति के विचारणार्थ योग्य समझा जायेगा।
1- (क) (ब) सदस्यों से प्राप्त शुल्क को प्रत्येक छः वर्षो में नीचे दिए गए अनुपात के रूप में बाँट दिया जायेगा :-
केन्द्रीय चुनाव फंड हेतु सुरक्षित  – 50 %
राष्ट्रीय पार्टी कोष –           25 %
प्रदेश कमेटी –          12.5 %
जिला कमेटी-          12.5 %
प्रदेश एवं जिला कमिटी द्वारा मण्डल कमिटी को 2.5% – 2.5% प्रतिशत दिया जायेगा।
नोट – चंदे एवं पार्टी फण्ड में प्राप्त राशि को प्रदेश/ जिला एवं मण्डल में किस अनुपात में बाटा जायेगा इसका निर्णय राष्ट्रीय कार्यकारणी कि अनुशंसा पर राष्ट्रीय अध्यक्ष कि अनुमति से तय किया जायेगा।
1- (ख) प्रत्येक सदस्य को नीचे लिखी शर्ते पूरी करनी होगी और अपने हस्ताक्षर में सदस्यता फॉर्म में निम्नलिखित घोषणा करनी होगी किः-
(क) उसकी आयु 18 वर्ष या अधिक है।
(ख) वह अहिंसा पथ मार्ग को स्वीकारता है। एवं भारतीय संस्कृति के प्रति आस्था रखता है।
(ग) वह मादक पेयों और नशीले पदार्थों से अपने को दूर रखता है।
(घ) वह न तो छुआ-छूत में विश्वास रखता है और न किसी भी शक्ल में छुआ-छूत व्यवहार में लाता है और छुआ-छूत को मिटाने हेतु काम करने के लिए तत्पर है।
(ड़) वह धर्म और जाति को भेद – भाव रहित एक सूत्र में बंधे समाज के प्रति विश्वास रखता है।
(च) वह कार्य समिति द्वारा निर्धारित न्यूनतम कार्यों के लिए तैयार है, जिनमें शारीरिक श्रम भी शामिल है।
(छ) उस पर लागू होने वाली जायदाद की कानूनी तौर पर निर्धारित सीमा से अधिक कोई जायदाद उसके पास नहीं है।
(ज) वह धर्मनिरपेक्षता, समाजवाद और जनतंत्रवाद के सिद्धांतों में विश्वास रखता है और उनको आगे बढ़ाने के लिए काम करता है और प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से, खुले तौर पर या अन्य किसी प्रकार से केवल पार्टी मंचों को छोड़कर, और कहीं भी पार्टी की स्वीकृत नीतियों और कार्यक्रमों का विरोध या आलोचना नहीं करता है।
(झ) वह पार्टी द्वारा स्वीकृत पत्रिका का नियमित ग्राहक बनेगा।
1- (ग) सदस्यों का प्रशिक्षण
1- (ग) -1- प्रत्येक सदस्य न्यूनतम प्रशिक्षण प्राप्त करेगा जो कि कार्य समिति द्वारा निर्धारित किया जायेगा।
1- (ग) -2- किसी भी सदस्य को निम्नलिखित चुनावों में खड़े होने का तब तक अधिकार नही होगा जब तक कि वह कार्य समिति द्वारा निर्धारित न्यूनतम प्रशिक्षण प्राप्त करने का वचन न दे देः-(क) राष्ट्रीय
(ख) प्रदेश कमेटी
(ग) जिला/ शहर कमेटी की कार्यकारिणी
(घ) पार्टी टिकट पर संसद, राज्य विधानमंडल, महानगर परिषद या स्थानीय निकाय के किसी भी चुनाव में।
1- (ग)- 3- संसद, राज्य विधानमण्डल और स्थानीय निकायों में पार्टी टिकट पर चुनाव लड़ने के लिए किसी भी व्यक्ति का चयन उस समय तक नही होगा जब तक कि वह पार्टी सदस्य न हो।धारा-10 (2) सक्रिय सदस्य पार्टी संविधान की धारा-10 के अन्तर्गत सक्रिय सदस्यों के लिए निम्नलिखित न्यूनतम क्रार्यक्रम निम्नानुसार होगा जो कि निम्नांकित कार्यक्रमों के 70% कार्य में सम्मिलित होने वाला सदस्य ही सक्रिय सदस्यों की श्रेणी में आ सकेगाः-
(क) पार्टी के सदस्यों की भर्ती करना,
(ख) पार्टी कोष के लिए चंदा इकट्ठा करना,
(ग) प्रत्येक वर्ष कम से कम एक सप्ताह का शारीरिक श्रम, जिसमें अहिंसा प्रचार, पद यात्राएं, पहुंच मागों का निर्माण, नहरों या नालियों की सफाई एवं खुदाई, वृक्षरोपण, गंदी बस्तियों की सफाई, गांव की स्वच्छता इत्यादि कार्य शामिल होंगे।
(घ) कार्य समिति द्वारा समय – समय पर निर्देशित राजनीतिक और सैद्धांतिक अध्ययन कार्यक्रमों में सदस्यों, संगठनात्मक समितियों के पदाधिकारि और पार्टी के विधान मण्डलीय सदस्यों का भाग लेना जरूरी होगा। इस प्रकार निर्धारित कार्यक्रमों में भाग न लेने वाले व्यक्तियों को संगठन में किसी भी पद पर रहने के लिए अयोग्य करार दिया जा सकता है।
(ड) पार्टी के किसी भी इकाई (राष्ट्रीय / प्रदेश) द्वारा प्रकाशित की जाने वाली पत्रिकाओं अथवा प्रदेश कमेटी द्वारा मान्यता-प्राप्त पत्रिका के लिए ग्राहकों की भर्ती करना।
(च) सामाजिक क्षेत्र में सुधार के कार्य जैसे- दहेज प्रथा और बाल-विवाह के विरोध तथा परिवार नियोजन संबंधी कार्यक्रम इत्यादि।
(छ) सदस्यों को आमतौर पर स्वदेशी सामान और वस्तुएं प्रयोग करनी चाहिए।
(ज) सदस्यों द्वारा निम्नांकित रचनात्मक कार्यों में से किसी एक या अधिक कार्य का किया जाना आवश्यक होगाः-
1- शिक्षा
2- मद्य-निषेध
3- खादी और ग्रामोद्योग
4- युवक और छात्रा संगठन
5- श्रमिक संगठन
6- किसान संगठन
7- अल्प बचत अभियान
8- ग्राम स्वच्छता, स्वास्थ्य और सफाई
9- राष्ट्र भाषा का प्रचार
10- अहिंसा का प्रचार
11- भारतीय संस्कृति का प्रचार प्रसार
12- सहकारी समितियों का विकास
13- निर्वाचन क्षेत्रों में कार्य
14- सेवादल
15- कुष्ठ पीडि़तों की सेवा
16- अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के कल्याण कार्य
17- छुआछूत दूर करना18- राष्ट्रीय एकता के लिए, विशेषकर अल्पसंख्यकों के बीच, कार्य
19- प्रौढ़ शिक्षा और वाचनालय आन्दोलन के लिए कार्य
20- पार्टी साहित्य की बिक्री
21- कार्य समिति द्वारा समय-समय पर निर्धारित किये जाने वाले कोई विशेष कार्यक्रम।
धारा -10(3) सदस्यता आवेदन-पत्र हेतु नियम
1. राष्ट्रीय कमेटी सदस्यता आवेदन पत्र छापेगी। जो कि प्रदेश / जिला /शहर / मण्डल कमेटी की कार्यकारिणी को राष्ट्रीय कमेटी द्वारा फॉर्म उपलब्ध करवाया जायेगा लेकिन विशेष स्थिति में राष्ट्रीय कमेटी के अनुमति से प्रदेश एवं जिला कमेटियों को सदस्यता आवेदन पत्रों को छपवाने का लिखित अधिकार दिया जा सकता है। यदि कोई प्रदेश या जिला कमेटी इस प्रकार का अधिकार प्राप्त किये बिना आवेदन पत्रों को छपवाती है तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही की जा सकती है।
2. सदस्यता आवेदन पत्रों पर क्रमानुसार नम्बर डाले जाएंगे और प्रदेश एवं जिला कमेटियों द्वारा छापे गये आवेदन पत्रों पर जिले का नाम भी अंकित होगा। इस प्रकार छापे गये आवेदन पत्रों को मण्डल कमेटियों को भेजने से पहले प्रदेश एवं जिला कमेटी उनका पूर्ण विवरण राष्ट्रीय कमेटी को भेजना होगा।
3. सदस्यता-आवेदन-पत्रों की प्रत्येक पुस्तिका में 20 सदस्यता आवेदन-पत्रो का होगा।
4. (क) जिले में सदस्यों की भर्ती जिला कमेटी की प्राथमिक जिम्मेदारी होगी। प्रदेश कमेटी जिला कमेटी को सदस्यता आवेदन-पत्र भेजेगी और वह उन्हे अपनी मण्डल कमेटियों और उनके द्वारा व्यक्तिगत लोगों को जारी करेगी। किसी भी व्यक्ति को एक साथ 500 सदस्यता आवेदन-पत्र से अधिक नहीं दिये जाएंगे। तथापि संसद सदस्यों, विधान सभा सदस्यों, विधान परिषद सदस्यों और राष्ट्रीय कमेटी के सदस्यों तथा प्रदेश कमेटी के पदाधिकारियों के मामले में ऐसे व्यक्तियों को एक बार में 1000 आवेदन पत्र दिये जा सकते हैं। किसी व्यक्ति को इससे अधिक आवेदन-पत्र तभी दिये जाएंगे जबकि वह पहले दिये गये आवेदन-पत्रों का पूरा हिसाब दे चुका हो और उनसे प्राप्त शुल्क जमा कर चुका हो।
(ख) यदि मण्डल कमेटियों के खिलाफ यह शिकायत हो कि उन्होने काफी संख्या में सदस्यता आवेदन-पत्र उपलब्ध नहीं कराये हैं, तो जिला पार्टी कमेटी व्यक्ति विशेष को ये आवेदन-पत्र दे सकती है और यदि वह उचित समझती है तो ऐसी कमेटियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही कर सकती है। यदि जिला कमेटियों के खिलाफ यह शिकायत हो कि वे उचित ढंग से सदस्यता आवेदन-पत्रों का वितरण नहीं कर रही है तो प्रदेश कमेटी उन व्यक्तियों को सीधे आवेदन-पत्र जारी कर सकती है और संबंधित जिला कमेटियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही कर सकती है।
(ग) सदस्यों की भर्ती के आवेदन-पत्र किसी भी हालत में उन लोगों को नहीं दिए जाएंगे जो कम से कम पार्टी के सदस्य भी नहीं हैं।
धारा 10 (4) – सदस्य पंजिका
1 – स्थानीय एवं मंडल कमेटी द्वारा सदस्यों की पंजिका तैयार किया जायेगा जिसे राष्ट्रीय कमेटी के निर्देशानुसार प्रदेश, जिला एवं सम्बंधित कमेटी को भेजा जायेगा।
2- इस तरह पंजिका तैयार किया जायेगा-
1- क्रम संख्या
2- नाम
3- पुरुष / महिला
4. अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति / अन्य पिछड़ावर्ग / अल्पसंख्यक
5- पिता या पति का नाम
6- स्थायी पता
7- वर्तमान पता
8- उम्र
9- पेशा
10- भर्ती होने की तारीख
11- प्रारंभिक यूनिट की क्रम संख्या और नाम
12- सदस्यता आवेनद-पत्र क्रम संख्या
13- सदस्यता नवीनीकरण की तारीख
14- सदस्यता की अवधि
15- सदस्यता शुल्क जमा करने की तारीख
16- टिप्पणिया

धारा 11-  समितियों (कमेटी) का गठन
11 (1) – स्थानीय कमेटी स्थानीय कमेटी में 24 सदस्यों की कमेटी का गठन किया जायेगा जिसमे एक अध्यक्ष, दो उपाध्यक्ष, दो महामंत्री, दो मंत्री, तीन महासचिव, दो संयुक्त महासचिव, तीन सचिव, दो संयुक्त सचिव, एक कोषाध्यक्ष एवं शेष सदस्य होंगे जिसमे से चार महिला सदस्य होना अनिवार्य होगा।
11 (2)- मण्डल कमेटी मण्डल कमेटी में 30 सदस्यों की कमेटी का गठन किया जायेगा जिसमे एक अध्यक्ष, तीन उपाध्यक्ष, तीन महामंत्री, तीन मंत्री, तीन महासचिव, दो संयुक्त महासचिव, तीन सचिव, एक कोषाध्यक्ष, एवं शेष सदस्य होंगे जिसमे से आठ महिला सदस्य होना अनिवार्य होगा एवं अनुसूचित / जनजाति को स्थान दिया जा सकेगा।
11 (3) जिला पार्टी कमेटी जिला कमेटी में अध्यक्ष के अतिरिक्त अधिक से अधिक 50 सदस्यों की कमेटी का गठन किया जायेगा जिसमे चार उपाध्यक्ष, तीन महामंत्री, तीन मंत्री, तीन महासचिव, दो संयुक्त महासचिव, तीन सचिव, एक कोषाध्यक्ष एवं शेष सदस्य होंगे जिसमे से दस महिला सदस्य होना अनिवार्य होगा एवं अनुसूचित / जनजाति को स्थान दिया जायेगा। निम्नलिखित सदस्य ही समिति सदस्य बनने के लिए पात्रता रखेंगेः-
(क) कार्य समिति द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार जिला पार्टी कमेटी के अधीनस्थ प्रत्येक ब्लॉक पार्टी कमेटी में से छः सदस्य होंगे।
(ख) प्रदेश कमेटी के सदस्य जो जिले में रहते हैं या जिले से चुने गये हैं।
(ग) मंडल कमेटियों के अध्यक्ष, बशर्ते कि वे जिला कमेटी के अध्यक्ष अथवा मंत्री पद के दावेदार नहीं होंगे।
(घ) जिले से विधायक दल, केन्द्र और राज्य दोनों के सदस्य बशर्ते कि वे पार्टी के सदस्य हों।
(ङ) जिले की नगरपालिका, नगर निगम और जिला बोर्ड/जिला परिषद या जनपद के पार्टी के नेता, बशर्ते कि वे पार्टी के सदस्य हों।
(च) दस महिला सदस्य एवं अनुसूचित / जनजाति के सदस्य बशते की वो पार्टी सदस्य होना चाहिए।
(छ) कार्य समिति द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार जिला पार्टी कमेटी की कार्यकारिणी द्वारा सहवरित सदस्य।

धारा 12 – प्रदेश परिषद
(1) – प्रदेश परिषद में निम्नलिखित सदस्य होंगे बशर्ते की वो धारा 10 (2) के अन्तर्गत आते हों।(1) (क) प्रदेश के जिले के मण्डलों से निर्वाचित सदस्य।
(1) (ख) राज्य में पार्टी के निर्वाचित 8 विधायक एवं 8 से काम होने पर समस्त विधायक।
(1) (ग) राज्य में पार्टी के संसद में निर्वाचित 3 सदस्य यदि संख्या 3 से कम हो तो समस्त सदस्य।
(1) (घ) राज्य से राष्ट्रिय परिषद के सभी सदस्य।
(1) (ङ) प्रदेश के समस्त पूर्व अध्यक्ष।
(1) (च) प्रदेश कार्यकारणी के सभी सदस्य।
(1) (छ) क्षेत्रीय कमेटियों के समस्त पदाधिकारी।
(1) (ज) प्रदेश के समस्त जिलाध्यक्ष एवं महामंत्री
(1) (झ) महानगर परिषद, नगरपालिका, जिला परिषद तथा मण्डल समिति के अध्यक्ष।
(1) (णः) प्रदेश अध्यक्ष द्वारा नामांकित सदस्य परिषद की सदस्यता के पात्र होंगे बशर्ते की वो पार्टी के धारा 10 (2) के अन्तर्गत सदस्य हो एवं उनकी संख्या 30 से अधिक ना हो।
(1) (ट) सम्बद्ध मोर्चाओ के प्रदेश अध्यक्ष तथा प्रकोष्ठों के संयोजक।

धारा 13- प्रदेश कार्यकारणी
प्रदेश कार्यकारणी में एक अध्यक्ष और अधिक से अधिक 70 सदस्य होंगे जिसमे सात प्रदेश उपाध्यक्ष, छः महामंत्री, एक संगठन महामंत्री चार संयुक्त महामंत्री, चार महासचिव, चार सचिव, एक कोषाध्यक्ष, चार प्रवक्ता, चार मीडिया प्रभारी एवं शेष सदस्य होंगे जिनका चुनाव राष्ट्रीय कार्य परिषद के द्वारा किया जायेगा, जिनमे से पंद्रह महिला सदस्य होना एवं पांच महिला पदाधिकारी होना अनिवार्य रहेगा एवं अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति को स्थान दिया जा सकेगा।

धारा 14- राष्ट्रीय परिषद
(1) राष्ट्रीय परिषद के निम्नांकित सदस्य होंगे।
(क) प्रदेशों से लोकसभा क्षेत्रो से प्रत्येक क्षेत्र से राष्ट्रीय परिषद के लिए प्रदेश द्वारा निर्वाचित कर भेजा जायेगा वो राष्ट्रीय कार्य परिषद के सदस्य नियुक्त हो सकेंगे।
(ख) पार्टी के संसद सदस्यों में से सदस्यों द्वारा चुने गए 8 सदस्य यदि 8 से कम हो तो सभी।
(ग) पार्टी के भूतपूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष।
(घ) प्रदेशों के अध्यक्ष।
(ङ) लोकसभा राजयसभा में पार्टी के नेता।
(च) समस्त प्रदेशों के विधान सभा परिषदो में पार्टी ने नेता।
(छ) राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा अधिक से अधिक 50 नामांकित सदस्य।
(ज) राष्ट्रिय कार्यकारणी के सभी सदस्य एवं
(झ) अखिल भारतीय स्तरीय मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं प्रकोष्ठों के अखिल भारतीय संयोजक।

धारा 15 – राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव
(क) अध्यक्ष का चुनाव एक निर्वाचक अधिकारी द्वारा करवाये जायेगे जिसमे।
(ख) राष्ट्रीय कार्यकारणी मण्डल में से कोई भी पांच डेलीगेट संयुक्त रूप से किसी भी प्रत्याशी का नाम पार्टी अध्यक्ष के तौर पर चुने जाने के लिए पेश कर सकेंगे। ऐसे प्रस्तावों का कार्य समिति द्वारा निश्चित की गयी तारीख पर या उससे पहले ही निर्वाचन-अधिकारी के पास भेजा जाना जरूरी होगा।
(ग) निर्वाचन अधिकारी इस प्रकार प्रस्तावित सभी प्रत्याशीयों के नाम प्रकाशित करेगा और जिन प्रत्याशीयों के नाम इस प्रकार प्रस्तावित किये जा चुकेंगे उनमें से किसी भी व्यक्ति को छूट रहेगी कि वह प्रस्तावित नामों के प्रकाशन के सात दिन के अन्दर निर्वाचन-अधिकारी को लिखित रूप से देकर अपना नाम उम्मीदवारी से वापस ले सकता है।
(घ) निवार्चन-अधिकारी उम्मीदवारी से अपना नाम वापस लेने वाले व्यक्तियों के नाम निकालकर बाकी उम्मीदवारों के नाम तुरन्त प्रकाशित करेगा और उन्हें धारा 14 (क) एवं (ख) में निर्धारित सदस्यों के पास भेज देगा। नाम निकाले जाने के बाद यदि केवल एक ही उम्मीदवार शेष रह जाए, तो उसे आगामी पार्टी अधिवेशन का विधिवत् निर्वाचित अध्यक्ष घोषित किया जायेगा।
(ड) अध्यक्ष के चुनाव के लिए कार्य समिति द्वारा निश्चित की गई तारीख पर, जो सामान्यतः प्रतिस्पर्धी उम्मीदवारों के नामों के अंतिम प्रकाशन की तिथि से कम से कम सात दिन बाद ही होगी, धारा 14 (क) एवं (ख) के प्रत्येक सदस्यों को अध्यक्ष के चुनाव के लिए लिखे नियमानुसार मत देने का अधिकार होगा, यदि सिर्फ दो ही उम्मीदवार हों तो प्रत्येक उम्मीदवार मतदान के पर्चे पर, जिस पर उम्मीदवारों के नाम होंगे, किसी एक के ही पक्ष में मत देगा और यदि दो से अधिक उम्मीदवार हों तो जिन उम्मीदवारों के पक्ष में मत दे रहे हो, उनके नाम के सामने 1, 2 आदि अंक लिखकर कम से कम दो तरजीहें दिखाएगा। दो से अधिक उम्मीदवारों के होने की अवस्था में डेलीगेट चाहे तो दो से अधिक तरजीहें भी दिखा सकेगा। लेकिन वोट के जिन पर्चों पर दो से कम तरजीहें होंगी, उन्हें अवैध समझा जायेगा। मतदान पत्र इस कार्य के लिए निर्धारित मतपेटी में रखे जायेंगे।
(च) धारा 14 (क), (ख) के सदस्यों द्वारा मतपेटियों को तुरन्त राष्ट्रीय पार्टी कमेटी को सौपना होगा।
(छ) मतपेटियों के मिलने के बाद निर्वाचन अधिकारी प्रत्येक उम्मीदवार के पक्ष में दिए गऐ मतों की अथवा पहली तरजीहों की यथाशीघ्र गणना करेगा। यदि कोई उम्मीदवार पहली तरजीहों के 50% से अधिक मत प्राप्त कर देगा तो उसे अध्यक्ष निर्वाचित घोषित किया जाएगा। यदि किसी भी उम्मीदवार को पहली ही तरजीह में 50% से अधिक मत न मिलें तो जिस उम्मीदवार को पहली तरजीहें सबसे कम मत मिलेंगी, उसका नाम निकाल दिया जायेगा और जिन मतदाताओ ने उसे पहली तरजीहें दी हैं, उनकी दूसरी तरजीहों को बाकी उम्मीदवारों की मतगणना करते समय गिना जायेगा। इस गणना में जिस उम्मीदवार को सबसे कम मत मिलेंगे, उसका नाम काट दिया जायेगा। उम्मीदवारों को कम करने की इस प्रक्रिया में लगातार गणना क्रम में सबसे कम मत पाने वाले उम्मीदवारों के मतों को उन पर दो तरजीहों के अनुसार स्थानांतरित किये जाने के बाद जिस उम्मीदवार को 50प्रतिशत से अधिक मत मिलेंगे उसे अध्यक्ष निर्वाचित घोषित किया जायेगा।
(ज) किसी कारणवश आपातस्थिति पैदा हो जाने की दशा में जैसे कि उपर्युक्त ढंग से निर्वाचित अध्यक्ष की मृत्यु हो जाने से या पद त्याग देने के कारण वरिष्ठतम महामंत्री अध्यक्ष के दिन प्रतिदिन के कार्यों का भार संभालेंगे जब तक कि पार्टी कमेटी द्वारा नियमित रूप से अध्यक्ष का चुनाव नहीं होता और उस बीच कार्य समिति एक अस्थायी अध्यक्ष की नियुक्ति नही कर देती।
(झ) अध्यक्ष अपने चुनाव के पश्चात एवं अपने कार्यकाल में होने वाले पार्टी के अधिवेशन में सभापति का कार्य करेगा और जब कार्य समिति की बैठक न हो रही हो तो वह कार्य समिति के अधिकारों का प्रयोग करेगा।

धारा 16- राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यकाल  राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यकाल 10 वर्ष का होगा।

धारा 17- राष्ट्रीय कार्यकारणी
(1) राष्ट्रीय कार्यकारणी में अध्यक्ष तथा अधिक से अधिक 122 सदस्य होंगे जिनमे से 42 महिला सदस्य होगी,
(2) अध्यक्ष द्वारा राष्ट्रीय कार्यकारणी सदस्यों में से उपाध्यक्ष, महासचिव, बारह महामंत्री, बाईस मंत्री, एक कोषाध्यक्ष, एक प्रमुख प्रवक्ता, दस प्रवक्ता, चार मीडिया प्रभारी मनोनीत किया जा सकेगा।  जिनमे 10 महिलओं को स्थान देना होना।
(3) कार्यकारणी में केवल वो सदस्य ही रह सकेंगे जो पार्टी के सक्रिय सदस्य हो विशेष स्थिति में राष्ट्रीय अध्यक्ष इस शर्त से छूट दे सकते है।

धारा 18- कार्यकालअध्यक्ष एवं प्रत्येक पदाधिकारियों का कार्यकाल साधारणतः पांच वर्ष का होगा।

धारा 19-  अधिवेशन
(अ) पूर्ण अधिवेशन
(1) पूर्ण अधिवेशन में भाग लेने के लिए पार्टी के निम्नलिखित सदस्य ही अधिकृत होंगे।
(क) राष्ट्रीय परिषद,
(ख) प्रदेश परिषद,
(ग) पार्टी के सभी संसद सदस्य,
(घ) प्रदेश में पार्टी विधान मंडल दल के समस्त सदस्य,
(ङ) राष्ट्रीय कार्यकारणी द्वारा उस अधिवेशन हेतु निर्धारित की गयी श्रेणियाँ
(2) पार्टी का पूर्ण अधिवेशन साधारणतः वर्ष में एक बार होगा एवं अधिवेशन स्थल एवं तिथि की घोषणा राष्ट्रीय कार्यकारणी द्वारा निर्धारित किया जायेगा।
(3)  अधिवेशन की अध्यक्षता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा किया जायेगा। 
(ब) विशेष अधिवेशन
(1) विशेष अधिवेशन में राष्ट्रीय परिषद के सदस्य ही सम्मिलित होने के लिए अधिकृत होंगे।
(2) विशेष अधिवेशन विशेष विषयों पर चर्चा करने हेतु राष्ट्रीय परिषद के 1/3 सदस्यों द्वारा अनुरोध करने की दशा में राष्ट्रीय कार्यकारणी द्वारा आयोजित किया जायेगा जिसके स्थान और तिथि की जानकारी राष्ट्रीय कार्यकारणी द्वारा उपलब्ध करवाया जायेगा।

धारा 20- शक्तियां एवं अधिकार
(क) राष्ट्रीय कार्य परिषद पार्टी का सर्वोत्तम परिषद होगा राष्ट्रीय कार्यकारणी उन सभी अधिकारों का उपयोग कर सकेगी, जिनसे किसी उपसमिति को स्पष्ट रूप से नही दिया गया होगा। राष्ट्रीय कार्यकारणी सभी उपांग एवं इकाइयों उपसमितियों के लिए कार्य संचालन नियम का निर्माण करेगा। उपांग / इकाइयों / उपसमितियों के द्वारा पार्टी कोष के लिए प्राप्त फण्ड का हिसाब रखने अंकेक्षण एवं स्वीकृति हेतु नियम बनाना एवं संचालन व्यवस्था करना राष्ट्रीय कार्यकारणी के अंतर्गत रहेगा।
(ख) राष्ट्रीय कार्य परिषद पार्टी की सर्वोत्तम नीतियों का निर्धारण करेगी एवं पूर्ण अधिवेशन अथवा विशेष अधिवेशन में लिए गए सभी निर्णय पार्टी की सभी इकाइयों, संगठन के सभी अंगो, मोर्चो, प्रकोष्ठों तथा सदस्यों पर लागु होंगे।
(ग) राष्ट्रीय कार्यकारणी का कर्तव्य दायित्व होगा की वो उपांगों / इकाइयों / उपसमितियों को कार्य-संचालन हेतु अधिकार प्रदान करे एवं उनके कार्यसंचालन का मार्गदर्शन व संचालन के साथ कर्तवों का निर्धारण करे।
(घ) पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारणी द्वारा चुनावो के लिए नियम नीति गठन किया जायेगा तथा चुनाव करवाने हेतु व्यवस्था करने के साथ तत्संबंधीविवादों का निपटारा करवाये।
(ङ) सभी उपांगों / इकाइयों / उपसमितियों का नैतिक दायित्व होगा की वह राष्ट्रीय कार्यकारणी द्वारा निर्धारित उत्तरदायित्व संभालेगी तथा अपने -अपने क्षेत्र में राष्ट्रीय कार्यकारणी द्वारा निर्धारित कर्तवों का पालन करेगी।
(च) राष्ट्रीय कार्यकारणी द्वारा विभिन्न कार्यकार्णियों में निष्कासन – त्यागपत्र अथवा मृत्यु से रिक्त हुए पद की पूर्ति हेतु एवं अनुशासनहीनता के मामलों के निपटान के लिए अनुशासन समितियों का गठन तथा नियम बनाएगी।

धारा 21- संसदीय समिति कार्यसमिति पार्टी के विधानसभा दलों की गतिविधियों के नियमन तथा समन्वय के लिए संसदीय समिति गठित करेगी जो कि इस बारे में नियम बनाएगा और जिसमें अध्यक्ष के अतिरिक्त अन्य नौ सदस्य होंगे, जिनमें से एक संसद में पार्टी दल का नेता होगा। पार्टी अध्यक्ष इसके सभापति होंगे।

धारा 22 – केंद्रीय चुनाव समिति राष्ट्रीय कार्यकारणी निर्धारित नियमो के अनुसार केंद्रीय चुनाव समिति का गठन करेगी, महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष इस समिति की पदेन सदस्य होगी व संसदीय समिति के सदस्यों के अतिरिक्त इस समिति हेतु निर्वाचित 8 सदस्य होंगे।
(1) यह समिति प्रादेशिक चुनाव अभियान के संचालन के साथ ही विधानमण्डलों तथा संसद के लिए उम्मीदवारों का अंतिमरूप से चयन करेगी।
धारा 23 – प्रदेश चुनाव समिति
प्रदेश कार्यकारणी आवश्यक नियम बनाकर प्रदेश चुनाव समिति का गठन करेगी, जिसमे सदस्यों की अधिकतम संख्या प्रदेश अध्यक्ष के अलावा 14 रहेगी, जिसमे महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष पदेन सदस्य होंगीः-
(1) यह समिति प्रदेश से संसद तथा विधान मंडल के लिए उम्मीदवारों के नाम केंद्रीय चुनाव समिति को प्रस्तावित करेगी।
(2) प्रदेश में होने वाले सभी चुनाव अभियानों के संचालन के साथ ही प्रदेश के अंतर्गत विभिन्न स्थानीय संस्थाओ, सहकारी समितियों तथा अन्य संस्थानों के लिए उम्मीदवारों का चयन करेगी।

धारा 24- समन्वय सदस्य
(क) प्रदेश: पार्टी के संगठनात्मक और विधायी पक्ष में समन्वय और सहयोग के लिए प्रदेश अध्यक्ष सात सदस्यों की समन्वय समिति का गठन करेंगे। प्रदेश अध्यक्ष समन्वय समिति के सदस्य होंगे जिसमे तीन सदस्य विधान मण्डल दल से होंगे जिसमे से एक विधायक दल का नेता और तीन प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य होंगे, यह समिति राष्ट्रीय संसदीय समिति के मार्गदर्शन व निर्देशन में कार्य करेगी।
(ख) जिला: स्थानीय निकायों के कार्यों में समन्वय और ताल मेल को बनाये रखने के लिए जिलाध्यक्ष जिलास्तर पर एक समन्वय समिति गठित करेंगे जिसमे जिलाध्यक्ष के साथ जिला समिति के चार वरिष्ठ सदस्यों से साथ ही निगमों, नगरपालिकाओं, जिलापंचायतों एवं सहकारी संस्थाओं के नेता होंगे, यह समिति प्रदेश समन्वय समिति के मार्गदर्शन व निर्देशन में कार्य करेगी।
(ग) मण्डल: मण्डल के अंतर्गत पंचायतों की गतिविधियों के समन्वय के लिए मण्डल अध्यक्ष मण्डल समन्वय समिति का गठन करेगा इस समिति में मण्डल अध्यक्ष के साथ मण्डल महासचिव व मण्डल के 2 अन्य सदस्यों के अलावा मण्डल के अधीन आने वाली ब्लाॅक पंचायत का नेता व ग्राम पंचायत के दो प्रतिनिधि रहेंगे, यह समिति जिला समिति के मार्गदर्शन व निर्देशन में कार्य करेगी।

धारा 25 – मोर्चे व प्रकोष्ठ का गठन
पार्टी में समस्त स्तर पर महिला, युवा, किसान, अल्पसंख्यक, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के कार्य हेतु मोर्चो का गठन के साथ ही राष्ट्रीय, प्रादेशिक एवं जिला स्तर पर समाज के अन्य क्षेत्रों में कार्य करने के लिए प्रकोष्ठों का गठन राष्ट्रीय कार्यकारणी द्वारा निर्धारित नियमो के आधार पर किया जा सकता है।
धारा 26- चुनावी विवाद
राष्ट्रीय कार्यकारणी द्वारा बनाये गए नियमो के अधीन प्रदेश कार्यकारणी, जिला एवं मंडल कार्यकारणी को अपने क्षेत्रान्तर्गत पार्टी इकाइयों के चुनाव समबन्धित विवाद के समाधान का अधिकार होगा।

धारा 27 – सदस्य पंजिका की छान- बीन
प्रदेश कार्यकारणी तथा जिला समिति प्रत्येक मण्डल के लिए तैयार किये गए छ: वर्षीय सदस्य्ता पंजिका की जाँच करेगी तथा पंजीकरण में हुए अनियमितता समबन्धी शिकायतों के समाधान की व्यवस्था करेगी तथा सदस्यता पंजिका में सुधार करवाएगी, बड़े पैमाने पर अनियमितता की स्थिति पर राष्ट्रीय कार्यकारणी अनुसार सम्बंधित विषय पर विचारणार्थ कार्यवाही करेगी। प्रदेश चुनाव अधिकारी द्वारा त्रुटिपूर्ण पंजिका की रीती पूर्वक जाँच ना होने तक चुनाव नहीं करवाएगा।

धारा -28 – पार्टी कोष
(1) प्रदेश कोष और खाताप्रदेश में कोष संग्रह, खर्च और हिसाब किताब रखने के कार्य की निरक्षण करने के लिए प्रदेश अध्यक्ष एक पांच सदस्यीय वित्त समिति का गठन करेंगे जो की पांच सदस्यों में से एक प्रदेश कोषाध्यक्ष होगा, यह समिति प्रदेश अध्यक्ष के निर्देशन के साथ ही राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष के मार्गदर्शन में कार्य करेगी।
(2) राष्ट्रीय कोष और खाता राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी को प्राप्त फण्ड की देख रेख राष्ट्रीय अध्यक्ष के आज्ञानुसार राष्ट्रीय कार्यकारणी में से चार सदस्यीय वित्त कमिटी के द्वारा किया जायेगा जिस कमेटी में एक राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष रहेगा।

धारा 29 – संविधान की व्याख्या
पार्टी संविधान की धाराओं और नियमो और उसके आशय की व्याख्या करने का सर्वोच्च अधिकार राष्ट्रीय कार्यकारणी को होगा एवं राष्ट्रीय कार्यकारणी का निर्णय पार्टी की समस्त इकाइयों के लिए अंतिम एवं बाध्यकारी निर्णय होगा।

धारा 30 – संविधान संसोधन
संविधान में संसोधन, परिवर्तन या परिवर्द्धन सिर्फ पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारणी द्वारा ही किया जायेगा एवं राष्ट्रीय परिषद को मार्गदर्शन का पूर्ण अधिकार होगा उक्त परिवर्तन या संसोधन राष्ट्रीय कार्यकारणी द्वारा निर्धारित तिथि से लागु किया या माना जायेगा। 
नियम (पार्टी संविधान की धारा 8 एवं 8 की उपधाराओं एवं धारा 15 के अधीन)
1- पार्टी के सदस्यता प्रपत्र राष्ट्रीय कार्यकारणी के द्वारा उपलब्ध करवाया जायेगा। एवं राट्रीय कार्यकारणी के अनुमतिनुसार प्रदेश कार्यकारणी को प्रपत्र छपवाने का अधिकार प्राप्त होगा।
2-  सदस्यता प्रपत्रो में क्रमवार संख्या डाली जायेगी। यह खण्ड छःवर्षीय काल-खण्ड के बाद पूनः प्रारंभ होगी। इन प्रपत्रों पर कार्यकालिन प्रदेशाध्यक्ष के मुहर मय हस्ताक्षर रहेगा।
3- सदस्यता प्रपत्र पुस्तिका के रूप में जारी किया जायेगा जो की 20 फार्म का होगा। 
4- प्रदेश मे सदस्य बनाने का उत्तरदायित्व जिला/ मण्डल कार्यकारणी का होगा। प्रदेश द्वारा जिला इकाईयों को सदस्यता प्रपत्र जारी करेगी जो की जिला अपने अधिनस्थ इकाईयों को जारी करेगी। विशेष परिस्थिति में व्यक्ति विशेष को भी सदस्यता प्रपत्र जारी किया जा सकता है। लेकिन एक बार में 30 से अधिक नही। किसी भी जिला / मण्डल या व्यक्ति विशेष को जारी प्रपत्रों का हिसाब व सदस्यता शुल्क जमा हो जाने के पश्चात ही पूनः सदस्यता प्रपत्र जारी किया जा सकेगा। प्रपत्र जारी करते समय संबंधित इकाई द्वारा संबंधित इकाई पदाधिकारी व व्यक्ति विशेष को प्रपत्र जारी करने कि रसीद पर हस्ताक्षर करवा कर लिया जायेगा। यदी संबंधित इकाई पदाधिकारी (प्रपत्र लेने वाला) या व्यक्ति विशेष प्रपत्र का हिसाब समयपूर्वक संबंधित इकाई को सुपुर्द नही कर पाता है तो उसके खिलाफ अनुशासत्नामक कार्यवाही करते हुए एक सत्र के लिए संगठन के चुनाव से निष्कसित कर दिया जायेगा।
(1) जिला इकाई द्वारा प्रत्येक सत्र के लिए स्थानीय एवं मण्डल समितियों के सूचिंयों के आधार पर तैयार करवायेगी जिसमें सत्र में नए जोडे गए सदस्यों में से निष्कासित-त्याग पत्र व मृत्यु जैसे अप्रिय घटना वाले सदस्यों को सूचि में से घटायेगी एवं तैयार ब्योरा का प्रदेश व राष्ट्रीय समिति को पहुचायेगी। 
(2) सक्रीय सदस्यों हेतु पद चुनाव हेतु स्थानीय / मण्डल एवं जिला कार्यकारणी के द्वारा अनुशंसात्मक सूची प्रदेश एवं राष्ट्रीय कार्यकारणी को भेजेगी राष्ट्रीय कार्यकारणी के विचारनार्थ के बाद ही प्रदेश कार्यकारणी द्वारा चुनाव करवाया जा सकेगा।
(3) कोई भी सदस्य एक साथ दो अलग -अलग स्थान से पार्टी सदस्य नही बन सकता है यदि उसका निवास स्थान परिवर्तन होता है तो उसको पूनः सदस्यता फार्म भर सदस्यता स्थान परिवर्तन करवाना होगा।
5 – जिलों /मण्डलों प्राप्त सक्रीय सदस्यता धन का विनियोग निम्नानुसार प्रदेश कार्यकारणी द्वारा वितरण किया जायेगा।
केन्द्रीय चुनाव फंड हेतु सुरक्षित  – 50 %
राष्ट्रीय पार्टी कोष –           25 %
प्रदेश कमेटी –           12.5 %
जिला कमेटी-           12.5 %
प्रदेश एवं जिला कमिटी द्वारा मण्डल कमिटी को 2.5 – 2.5 % प्रतिशत दिया जायेगा 
6- प्रदेश इकाईयां एवं उनकी अधीनस्त इकाईयां जो इन नियमों का पालन नही करेगी उनके विरूध अनुशासनात्मक कार्यवाही कि जायेगी।
7- पंचवर्षीय चुनाव के लिए राष्ट्रीय कार्यकारणी के द्वारा समय सारणी तय किया जायेगा। सदस्यों से संबंधित आपत्तियों के समाधान के लिए राष्ट्रीय कार्यकारणी द्वारा नियम बनाया जायेगा। तथा सदस्य पंजिका का प्राथमिक प्रकाशन स्थानीय, मण्डल केन्द्रो पर तथा सक्रीय सदस्यों कि पंजिका का प्रकाशन प्रदेश केन्द्रो पर होगा।
धारा 11 (1) स्थानीय समितिस्थानीय समिति क्षेत्र के सभी सदस्य चुनाव के लिए निर्धारित किए गए स्थान, समय और तिथि पर एकत्र होंगे। उम्मीदवार चुनाव के समय से 1 घण्टा पूर्व तक अपने नामांकन पत्र भर सकेंगे। नामांकन पत्रों के जांच पडताल और नामांकन वापसी के बाद यदि आवश्यक हुआ तो सामान्यतः हाथ उठाकर मत लिये जायेगे और अधिक मत मिलने वाले उम्मीदवार को विजेता के साथ पदाधिकारी घोषित किया जायेगा।
धारा 11 (2) मण्डल समितिमण्डल समिति का चुनाव गत सत्र कि तुलना में 15 प्रतिशत सदस्य भर्ती करना आवश्यक होगा।
धारा 12 (3) जिला समितिजिला एवं प्रदेश परिषद के चुनाव संबंधित क्षेत्र के मण्डलों कि संख्या के 40 प्रतिशत मण्डल गठित हो जाने के पश्चात ही कराये जायेंगे।

मतदान के संबंध मे नियम
स्थानीय कमेटी को छोड कर पार्टी के समस्त इकाईयों के चुनाव गुप्त मतदान पद्धति से होंगे वहीं प्रदेश अध्यक्ष, राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय परिषद के चुनाव की समयसारणी का निर्धारण केन्द्रीय चुनाव कमेटी के द्वारा किया जायेगा। मण्डल, जिले एवं प्रदेशों के चुनाव हेतु मतदान से एक दिन पूर्व नामांकन पत्र लिए जायेंगे। जांच के बाद नाम वापसी हेतु समय निश्चित किया जायेगा व एक नाम बचने पर सर्वसहमतीपूवर्क मतदान के दिन परिणाम घोषित किया जायेगा। यदि निर्वाचन आवश्यक हुआ तो मतदान हेतु चुनाव कमेटी द्वारा मतदान केन्द्र पर प्रत्याशीयों के नाम लिखकर बोर्ड पर टांग देगा जिस क्रमानुसार मतदाता को मतपर्ची पर नाम क्रम लिख कर मतपेटी में डालना आवशयक होगा जिसके पश्चात चुनाव कमेटी द्वारा मतगणना के पश्चात परिणाम घोषित कर दिया जायेगा। मतदान केन्द्र प्रत्याशी के साथ केवल उसका एक अभिकर्ता को प्रवेश करने की अनुमति रहेगी।
चुनाव संचालन व कमेटी का गठन
1 . राष्ट्रीय कार्यकारिणी द्वारा पार्टी के चुनाव करवाने के लिए राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी नियुक्त करेगी। राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी द्वारा प्रत्येक राज्य के लिए एक चुनाव अधिकारी नियुक्त करेगा जो की उस राज्य में जिला अध्यक्ष तथा प्रदेश परिषद के सदस्यों के चुनाव की व्यवस्था करेगा। राज्य चुनाव अधिकारी मण्डल चुनाव करवाने के लिए जिला चुनाव अधिकारी नियुक्त करेगा। उसी प्रकार जिला चुनाव अधिकारी स्थानीय चुनाव करवाने के लिए मण्डल चुनाव अधिकारी नियुक्त करेगा। जिला व मण्डल चुनाव अधिकारी उस क्षेत्र के बाहर के होने चाहिए जिस क्षेत्र के लिए चुनाव करवाये जा रहे हो। राज्य चुनाव अधिकारी को अपने राज्य से राष्ट्रीय परिषद की सदस्यता के लिए चुनाव लडने का अधिकार होगा। 
2- जिला चुनाव अधिकारी द्वारा मण्डल स्तर के चुनाव विवादों का समाधान किया जायेगा। जो कि विवाद उत्पन्न होने के तीन दिन के भीतर प्रस्तुत कर दिया जाना चाहिए। जिसका समाधान सात दिन के भीतर कर दिया जायेगा। जिला चुनाव अधिकारी के निर्णय के विरुद्ध अपील केन्द्रीय चुनाव अधिकारी द्वारा नियुक्त त्रिसदस्यीय प्रदेश स्तरीय पुनर्विचार समिति को 10 दिन के भीतर किया जा सकेगा।
3- प्रदेश परिषद सदस्यों और जिला अध्यक्ष के चुनाव संबंधित विवादों को 3 दिन के अन्दर प्रदेश चुनाव अधिकारी को दिया जा सकता है जिसका समाधान 5 दिन के भीतर सुलझा दिया जायेगा। प्रदेश चुनाव अधिकारी के निर्णय के विरुद्ध अपील केन्द्रीय चुनाव अधिकारी द्वारा नियुक्त त्रिसदस्यीय केन्द्रीय स्तरीय पुनर्विचार समिति को 10 दिन के भीतर किया जा सकेगा। जिसका समाधान एक माह के भीतर कर दिया जावेगा।
4- प्रदेशाध्यक्ष तथा प्रदेश से राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों का चुनाव करवाने हेतु राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी द्वारा निर्वाचन होने वाले प्रदेश के बाहर से चुनाव अधिकारी को चुनाव करवाने हेतु नियुक्त किया जावेगा। प्रदेश अधिवेशन के अवसर पर प्रदेशाध्यक्ष एवं राष्ट्रीय परिषद सदस्यों का निर्वाचन (पहले दिन नामांकन, नामांकन पर विचार एवं नाम वापसी प्रक्रिया के बाद दुसरे दिन मतदान के द्वारा) करवाया जायेगा। अथवा केन्द्रीय चुनाव अधिकारी की अनुमति से प्रदेशाध्यक्ष का चुनाव प्रदेश के जिला केन्द्रों पर मतदान की व्यवस्था करवाकर करवाया जा सकेगा बशर्ते कि मतदान के पश्चात सील बंद मतपेटी को प्रदेश केन्द्रों पर लाये जायेंगे जहां पर निर्धारित तिथि पर मतगणना कर सर्वाधिक मत प्राप्त करने वाले प्रत्याशी को विजयी घोषित कर दिया जायेगा। लेकिन प्रदेश में कम से कम 40 प्रतिशत जिलों से प्रदेश परिषद सदस्यों का चुनाव हो जाने के बाद ही प्रदेशाध्यक्ष एवं राष्ट्रीय परिषद के चुनाव प्रक्रिया प्रारंभ हो सकेगा।
5- राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी द्वारा 50 प्रतिशत राज्यों से राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों के चुनाव के बाद ही राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव कि प्रक्रिया प्रारंभ किया जा सकेगा।
6- नामांकन प्रक्रिया के पश्चात नाम वापसी प्रक्रिया समय सीमा समाप्त हो जाने के बाद एक से अधिक नाम रह जाने कि स्थिति में निर्धारित निर्वाचन तिथि में प्रदेश कि राजधानीयों में केन्द्रीय चुनाव अधिकारी द्वारा नियुक्त निर्वाचन अधिकारी कि निगरानी में मत डाले जायेंगे जो कि सीलबंद मत पेटीयों को शीघ्रता शीघ्र पार्टी मुख्यालय पर लाया जायेगा। जहां केन्द्रीय चुनाव अधिकारी द्वारा पूर्व निर्धारित तिथि को मतगणना कर उम्मीदवार को विजयी घोषित किया जायेगा।
7- प्रदेश निर्वाचन अधिकारी द्वारा निर्वाचन परिणाम घोषित करने के 15 दिन के भीतर प्राप्त शिकायत याचिका पर प्रदेश कार्यकारणी द्वारा गठित त्रिसदस्यीय समिति द्वारा विचार किया जायेगा। एवं एक माह में भेजी गई शिकायत याचिका पर केन्द्रीय कार्यकारणी द्वारा गठित त्रिसदस्यीय समिति द्वारा विचार किया जायेगा। इस समिति का निर्णय अंतिम एवं सर्वमान्य होगा।
अनुशासनात्मक कार्यवाही संबंधित नियम
1- अनुशासन संबंधित कम से कम पांच सदस्यों वाली अनुशासन समिति का गठन राष्ट्रीय एवं प्रदेश कार्यकारणी द्वारा राष्ट्रीय एवं प्रदेश स्तर पर गठित कि जायेगी जिसकी कार्य योजना समिति स्वयं निधारण कर सकेगी। प्रदेश अनुशासन समिति द्वारा केवल अपने अधीनस्थ इकाइयों तथा व्यक्तियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही किया जा सकेगा। जिसमें राष्ट्रीय परिषद के सदस्य एवं सांसद शामिल नहीं होंगे।
2- अनुशासन भंग के संबंध में राष्ट्रीय अध्यक्ष को एवं संबंधित प्रदेश के अध्यक्ष को संबंधित प्रदेश से संबंधित इकाई या व्यक्ति को निलम्बित किया जा सकता है किन्तु निलंबन के 7 दिन के भीतर कारण बताओ नोटीस जारी करना होगा। कारण बताओं नोटीस प्राप्त होने के अधिक से अधिक 10 दिन के भीतर संबंधित व्यक्ति को जवाब देना अनिवार्य होगा। प्रदेश अध्यक्ष को संबंधित व्यक्ति से स्पष्टीकरण मिलने के बाद या ना मिलने कि स्थिति में शिकायत को अनुशासन समिति को 7 दिन में भेज देंगे, जिसपर अनुशासन समिति विचार करेगी।
3- अनुशासन समिति अधिक से अधिक 15 दिन में अपनी रिपोर्ट प्रदेश अध्यक्ष को दे देगी। प्रदेश अध्यक्ष अनुशासन की सिफारिशों पर एक सप्ताह के भीतर कार्यवाही करेंगे। यदि निर्धारित समय सीमा पूरी होने पर भी अंतिम आदेश पास नहीं किया जाता है तो प्रदेश समिति के समक्ष निर्णय हेतु रखा जायेगा। प्रदेश अध्यक्ष द्वारा संबंधित व्यक्ति / इकाई को उसके विरूद्ध किये गये र्कावाही की सूचना देंगे।
4- किसी भी इकाई या व्यक्ति के विरुद्ध अनुशासन भंग करने कि कार्यवाही नही किया जायेगा जब तक उसे अपना पक्ष रखने या स्पष्टीकरण का अवसर नही दिया जाता।
5- राष्ट्रीय अध्यक्ष को एक सप्ताह के भीतर प्रदेश स्तर पर अनुशासन भंग करने के संबंध में किये गये कार्यवाही कि विस्तृत जानकारी देना अनिवार्य रहेगा।
6- प्रदेश अनुशासन समिति के द्वारा अनुशासन भंग संबंधित कार्यवाही से नाखुश या फैसले के विरुद्ध संबंधित व्यक्ति राष्ट्रीय अनुशासन समिति को 15 दिन के भीतर लिखित शिकायत भेज कर अपना पक्ष विचारनार्थ रखवा सकता है जो कि 2 माह में विचार करेगी एवं आवश्यक्ता पडने पर राष्ट्रीय कार्यकारणी की आगामी बैठक पर निर्णय लिया जायेगा एवं लिए गये निर्णय पर की गई कार्यवाही की जानकारी संबंधित व्यक्ति को दी जायेगी।
7- राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा किसी भी सदस्य को निष्कासित कर उसके खिलाफ कार्यवाही कि प्रक्रिया प्रारंभ कर सकेंगे एवं पार्टी के द्वारा घोषित उम्मीदवार के खिलाफ चुनाव लडने वाले सदस्य को प्रदेश अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा तुरंत प्रभाव से निष्कासित किया जा सकेगा। अनुशासन भंग की व्याख्या
अनुशासन भंग के निम्नलिखित आधार होंगेः-
(1) पार्टी द्वारा लिए गये किसी भी निर्णय अथवा कार्यक्रम के विरुद्ध कार्य करना या प्रचार करना।
(2) सार्वजनिक निकायों के निर्वाचन में पार्टी द्वारा अधिकृत उम्मीदवार का विरोध करना। इसमे वह निकाय शामिल नही है जिनमे पार्टी का चुनाव चिन्ह नही दिया गया हो।
(3) पार्टी के पदाधिकारियों के द्वारा पारित नियमों का उल्लंधन करना अथवा आदेश का अनुपालन करना।
 (4) पार्टी के किसी भी वाद को पार्टी के बाहर किसी भी सत्ता के समक्ष ले जाना जिसमें समाचार समूह (प्रिंट /वेब / इलेक्ट्राॅनिक/ रेडीयों मीडिया) सम्मिलित है।
(5) पार्टी के लिए सदस्य बनाने एवं चुनावों में कदाचार करना व पार्टी के लिए अनाधिकृत रूप से धन एकृतित करना एवं पार्टी के धन का दुरूपयोग करना।
(6) पार्टी के किसी भी इकाई व उसके पदाधिकारीयों के विरुद्ध प्रचार करना व किसी भी कारण या उद्देश्य से पार्टी के विरुद्ध कार्य या प्रचार करना।
बैठकें
राष्ट्रीय परिषद एवं प्रदेश परिषद कि बैठक प्रत्येक वर्ष में एक बार, राष्ट्रीय कार्यकारणी एवं प्रदेश कार्यकारणी कि बैठक वर्ष में चार बार या प्रत्येक तीन माह में एक बार, क्षेत्रीय /जिला /मण्डल समितियों की बैठक प्रत्येक 2 माह में एक बार, स्थानीय समिति की बैठक प्रतिमाह में एक बार होना अनिवार्य रहेगा। क्षेत्रीय /जिला /मण्डल समितियों की बैठक यदि छः माह में एक बार भी नही हो पा रही है तो उसे भंग किया जा सकेगा लेकिन जो इकाई निष्क्रिय हो जायेगी उन्हे स्पष्टीकरण का अवसर प्रदान करने के बाद ही निर्धारित समय सीमा के पश्चात भंग करने का अधिकार प्रदेश कार्यकारणी को होगा। राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं प्रदेश अध्यक्ष के द्वारा भंग कि गई इकाई के संचालन हेतु राष्ट्रीय एवं प्रदेश कार्यकारणी द्वारा अस्थाई समिति का गठन कर सकेंगे एवं छः माह पश्चात पुनः निर्वाचन के माध्यम से कार्यकारणी का गठन किया जा सकेगा, यदि छः माह बाद भी नई कार्यकारणी का गठन नही हो पाया तो पुनः अस्थाई कार्यकारणी नियुक्त कर सकेगी।
बैठक हेतु आमंत्रण सुचना
पार्टी के विभिन्न इकाईयों एवं अंगो को बैठक बुलाने के संबंध में संबंधित सदस्यों पदाधिकारियों को निम्नानुसार सामान्य स्थिति में एवं आपातकालीन स्थिति में बैठक संबंधित आमंत्रण सुचना भेजी जा सकेगी। सुचनार्थ हेतु समिति, कार्यकारणी, परिषद के नाम के साथ सामान्य स्थिति में एवं आपातकालीन स्थिति का उल्लेख किया जायेगा। स्थानीय समिति 5 दिन / 2 दिन, क्षेत्रीय, तथा मण्डल समिति 10 दिन / 3 दिन, जिला समिति 15 दिन / 5 दिन, प्रदेश कार्यकारणी  21 दिन / 7 दिन, राष्ट्रीय कार्यकारणी 21 दिन / 7 दिन, प्रदेश एवं राष्ट्रीय परिषद 30 दिन / 10 दिन के पूर्व सुचनार्थ बैठक आयोजित किया जा सकेगा।
रिक्त स्थान
(क) अपनी इकाई की बैठक से लगातार तीन दिन से अधिक बार बिना अनुमति अनुपस्थित रहने कि दशा में संबंधित इकाई कि बैठक में पारित प्रस्ताव द्वारा हटाया जा सकेगा।
(ख) स्थानीय, क्षेत्रीय, मण्डल तथा जिला अध्यक्ष को उस समिति के 2/3 सदस्यों के हस्ताक्षर के साथ लिखित अपील पर उच्चतर अध्यक्ष द्वारा अपने पदाधिकारी को नियुक्त कर संबंधित इकाई के सदस्यों कि बैठक आयोजित कर निर्णय ले प्रस्ताव पर विचार किया जा सकेगा व संबंधित इकाई के अध्यक्ष को निष्कासित किया जा सकेगा।
(ग) किसी भी इकाई का अध्यक्ष अपनी समिति के किसी सदस्य को अपनी समिति में प्रस्ताव पारित करने के पश्चात निष्कासित कर सकेगा।
(घ) प्रदेश अध्यक्ष को प्रदेश परिषद के सदस्यों के 1/3 सदस्यों के हस्ताक्षर से पारित प्रस्ताव से हटाया जा सकेगा।
(च) प्रदेश अध्यक्ष या अन्य इकाईयों के अध्यक्ष या प्रदेश व राष्ट्रीय परिषद के रिक्त पदों की पूर्ती पार्टी संविधान में दर्शाए गए निर्वाचन नियमों के अनुरूप किये जायेंगे।
मोर्चो एवं प्रकोष्ठों का प्रतिनिधित्व
राष्ट्रीय कार्यकारणी, राष्ट्रीय परिषद, प्रदेश कार्यकारणी एवं प्रदेश परिषद कि बैठक में विभिन्न मोर्चो एवं प्रकोष्ठों के प्रतिनिधि स्थायी आमंत्रित सदस्य होंगे। एवं राष्ट्रीय एवं प्रदेश मोर्चो एवं प्रकोष्ठों के संयोजक क्रमशः स्थायी आमंत्रित सदस्य होंगे।
अधिकार एवं उत्तरदायित्व
अध्यक्ष
(1) संबंधित समिति तथा परिषदों की बैठको की अध्यक्षता करना।
(2) संविधाननुसार अपनी समिति कार्यकारणी के पदाधिकारियों / सदस्यों को मनोनीत करना।
(3) विभिन्न पदाधिकारियों तथा समिति / कार्यकारणी के सदस्यों के बीच कार्य एवं उत्तरदायित्व का विभाजन करना।
(4) अनिवार्य परिस्थिति में समिति / कार्यकारणी के अधिकार का उपयोग करना। किन्तु आपातकालीन स्थिति में लिए गए निर्णय पर अगली बैठक में ही स्वीकृति लेना अवश्यक होगा।
(5) अन्य दलों से बातचीत में भाग लेना या उस कार्य के लिए अपने दल के प्रतिनिधि मनोनीत करना।
(6) अपनी समिति / कार्यकारणी की बैठक की तिथि निश्चित कर संविधान के अनुसार अवधि के भीतर बैठक आयोजित करना।
(7) अपनी इकाई के विभिन्न मोर्चो के अध्यक्ष व प्रकोष्ठों के संयोजक की सिफारिश / नियुक्ति करना एवं उनके कार्य विभाजन कर कार्य संचालन में सहयोग करना।
(8) अपनी इकाई, समिति / कार्यकारणी द्वारा आयोजित विभिन्न कार्यकरताओं के लिए एवं अन्य स्तर पर प्रशिक्षण शिविरों व सम्मेलनों का संचालन करना।
(9) पार्टी की संगठनात्मक/ रचनात्मक एवं आन्दोलनात्मक कार्यक्रमों के कार्यान्चयन में समिति / कार्यकारणी का मार्गदर्शन करना।
(10) विभिन्न इकाईयों के अध्यक्षों को एक समय में नियमानुसार निम्नलिखित धनराशि व्यय करने का अधिकार होगाः-स्थानीय समिति अध्यक्ष – रूपये 500/-मण्डल समिति अध्यक्ष – रूपये 1500/-क्षेत्र / जिला समिति अध्यक्ष – रूपये 8000/-प्रदेश समिति अध्यक्ष – रूपये 35000/-राष्ट्रीय अध्यक्ष – यथोचित राशिअनिवार्य परिस्थितियों में इससे अधिक धनराशि व्यय करने पर अगली बैठक में समिति / कार्यकारणी कि अनुमति लेना आवश्यक होगा। 
उपाध्यक्ष
समस्त इकाईयों समितियों के उपाध्यक्ष के अधिकार एवं उत्तरदायित्व नियमानुसार निम्नलिखित होंगे।
(1) अध्यक्ष द्वारा निर्देशित जिम्मेदारी का वहन करना।
(2) अध्यक्ष की अनुपस्थिति में अध्यक्ष जिस उपाध्यक्ष को लिखित रूप से निर्देशित करेगा वह बैठक कि अध्यक्षता करेगा। यदि कोई निर्दश ना होने कि दशा में समिति / कार्यकारणी बैठक में उपस्थित किसी भी उपाध्यक्ष को अध्यक्षता हेतु चुन सकती है एवं किसी भी अध्यक्ष कि भी उपस्थिति ना होने पर समिति / कार्यकारणी अपने में से किसी भी सदस्य को बैठक की अध्यक्षता हेतु आमंत्रित कर सकती है।
(3) अध्यक्ष कि अनुपस्थिति में अध्यक्ष द्वारा लिखित रूप से निर्देशित उपाध्यक्ष अध्यक्ष के समस्त उत्तरदायित्व व अधिकारों का वहन कर सकेगा।
महासचिव
समस्त इकाईयों समितियों के संगठन महामंत्री के अधिकार एवं उत्तरदायित्व नियमानुसार निम्नलिखित होंगे।
(1) अध्यक्ष द्वारा निर्देशित तिथियों पर बैठको का आयोजन करना जिसके लिए सुचना, विषय सूची भेजना एवं बैठक कि व्यवस्था करना।
(2) बैठक कि कार्यवाही का ब्यौरा रखना और उसे सदस्यों में वितरित करना।
(3) कार्यक्रमों, बैठको, सम्मेलनों, संघर्षों एवं प्रचार की व्यवस्था करना।
(4) अध्यक्ष कि स्वीकृतिनुसार पार्टी कार्यालय का संचालन करना एवं इस हेतु आवश्यक नियुक्ति करना।
(5) अध्यक्ष एवं समिति के निर्णयों का कार्यान्वयन करना।
महामंत्री
अध्यक्ष द्वारा निर्देशित उत्तरदायित्व का वहन करना तथा महासचिव को उसके कार्यों में सहयोग देना।
मंत्री
अध्यक्ष द्वारा निर्देशित उत्तरदायित्व का वहन करना तथा महामंत्री को उसके कार्यों में सहयोग देना।
कोषाध्यक्ष
समस्त इकाईयों समितियों के कोषाध्यक्ष के अधिकार एवं उत्तरदायित्व नियमानुसार निम्नलिखित होंगे।
(1) अपनी इकाई के आय – व्यय का ब्यौरा रखना।
(2) अपनी इकाई के आय – व्यय का ऑडिट करवाना और उसकी रिपोर्ट प्रतिवष समिति / कार्यकारणी को प्रस्तुत करना।
(3) अपने अधीनस्थ इकाइयों के आय – व्यय की जांच करना।
पार्टी कोष
(1) पार्टी कोष संग्रह के लिए राष्ट्रीय स्तरों पर ही रसीदे छपाई जायेगी। जो कि क्रमांकित होगी एवं 20 रसीद कि पुस्तिका छपाई जायेगी जो कि तीन पृष्ठों में होगी जिसमें प्रथम पृष्ठ चंदा दाता को दुसरा पृष्ठ संबंधित इकाई को एवं तीसरा पृष्ठ राष्ट्रीय वित विभाग को भेजी जायेगी।
(2) प्रत्येक रसीद पर राष्ट्रीय एवं प्रादेशीक कोषाध्यक्ष के हस्ताक्षर मुहर मुद्रीत किया जायेगा एवं चंदा संग्रहकर्ता को भी प्रत्येक रसीद पर अपने नाम के साथ स्पस्ट हस्ताक्षर करना अनिवार्य होगा।
(3) जिला स्तर तक पार्टी का खाता बैंक में खोला जायेगा। जिसका संचालन एवं धन आरहण कोषाध्यक्ष के हस्ताक्षर के साथ अध्यक्ष अथवा महामंत्री के हस्ताक्षर से किया जायेगा।
(4) सदस्यता चंदे की रकम को संविधान में किए गये प्रावधान के अनुसार प्रत्येक सदस्य को छ: चंदे के रूप में अपने सदस्यता फार्म के साथ जमा किया जाना होगा। चन्दे की बकाया रकम संबंधित सदस्य को प्रदेश पार्टी कार्यालय में वार्षिक अथवा नियमित रूप से किस्तों (वर्ष में 12 किस्तों से अधिक नहीं) में जमा करनी होगी।
(5) पार्टी संविधान के प्रावधानों के अनुसार सदस्यों से प्राप्त होने वाले चंदे का निम्नांकित ढंग से वितरण किया जायेगाः-केन्द्रीय चुनाव फंड हेतु सुरक्षित  – 50 प्रतिशतराष्ट्रीय पार्टी कोष – 25 प्रतिशतप्रदेश कमेटी – 12.5 प्रतिशत  जिला कमेटी- 12.5 प्रतिशतप्रदेश एवं जिला कमिटी द्वारा मण्डल कमिटी को 2.5 – 2.5 % प्रतिशत दिया जायेगा
 (6) प्रदेश कमेटी को राष्ट्रीय पार्टी कोष के हिस्से में आने वाले चंदे का भाग (50 प्रतिशत केन्द्रीय चुनाव फंड के लिए और 25 प्रतिशत राष्ट्रीय पार्टी कोष के लिए) तुरन्त भेजना होगा। प्रदेश कमेटी को संबंधित जिलों की जिला कमेटी का हिस्सा भी भेजना होगा।
(7) जिला कमेटी की मण्डल कमेटियों को प्रदेश एवं जिला कमेटी के हिस्से में से संबंधित अंश प्रदेश द्वारा निर्धारित ढंग से दिया जायेगा।
(8) आय – व्यय का वित्त ब्यौरा वित्तीय वर्ष 1 अप्रेल से प्रारंभ होकर 31 मार्च तक का होगा। पार्टी कि प्रत्येक समिति के हिसाब कि जांच (ऑडिट) करने हेतु समिति द्वारा प्रस्ताव में निर्धारित कर नियुक्त किया जायेगा। जिसकी स्वीकृति प्रतिवर्ष देना अनिवार्य होगा।
(9) आजीवन सहयोग निधि में जो सदस्य प्रतिवर्ष रूपये 1000/- या 5000/- या रूपये 10000/- का सहयोग देता है वह पार्टी का आजीवन सहयोगी सदस्य बन जायेगा। जिसका वितरण पार्टी कि राष्ट्रीय कार्यकारणी द्वारा निर्धारण किया जायेगा।
मोर्चो तथा प्रकोष्ठों के संदर्भ में नियम
(1) पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा संबंधित मौर्चों के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय संयोजकों को मनोनीत करेंगे। प्रदेश स्तर पर मौर्चों के अध्यक्ष का मनोयन संबंधित मोर्चे के राष्ट्रीय अध्यक्ष की अनुशंसा पर प्रदेश अध्यक्ष द्वारा किया जायेगा। इसी क्रम में जिला स्तर पर जिलाध्यक्ष एवं मण्डल स्तर पर मण्डल अध्यक्ष द्वारा मौर्चे के क्रमशः प्रदेश व जिला अध्यक्षों की अनुशंसा पर मोर्चे के जिला एवं मण्डल अध्यक्ष नियुक्त किये जायेंगे। मोर्चा कार्यसमिति में क्रमशः सदस्य हो सकेंगे- राष्ट्रीय मोर्चे में समस्त प्रदेशों के अध्यक्ष के अतिरिक्त मोर्चे के राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा मनोनीत अधिक से अधिक 65 सदस्य, प्रदेश मोर्चे में समस्त जिलों के अध्यक्ष के अतिरिक्त मोर्चे के प्रदेश अध्यक्ष द्वारा मनोनीत अधिक से अधिक 50 सदस्य, जिला मोर्चे में मण्डलो के अध्यक्ष के अतिरिक्त मोर्चे के जिला अध्यक्ष द्वारा मनोनीत अधिक से अधिक 35 सदस्य, मण्डल मोर्चे में जिलाध्यक्ष के मार्ग दर्शन में मण्डल अध्यक्ष द्वारा मनोनीत अधिक से अधिक 25 सदस्य। एवं समस्त मोर्चों के लिए क्रमशः निम्नानुसार पदाधिकारी नियुक्त किये जा सकेंगे- राष्ट्रीय मोर्चों के अध्यक्ष द्वारा ज्यादा से ज्यादा छः उपाध्यक्ष, तीन महामंत्री, एक कोषाध्यक्ष एवं सात मंत्री मनोनीत कर सकेंगे। प्रदेश मोर्चों के अध्यक्ष द्वारा ज्यादा से ज्यादा पांच उपाध्यक्ष, दो महामंत्री, एक कोषाध्यक्ष एवं पांच मंत्री मनोनीत कर सकेंगे। जिला मोर्चों के अध्यक्ष द्वारा ज्यादा से ज्यादा चार उपाध्यक्ष, दो महामंत्री, एक कोषाध्यक्ष एवं पांच मंत्री मनोनीत कर सकेंगे। मण्डल मोर्चों के अध्यक्ष द्वारा ज्यादा से ज्यादा दो उपाध्यक्ष, दो महामंत्री, एक कोषाध्यक्ष एवं दो मंत्री मनोनीत कर सकेंगे।
(2) समाज के अन्य क्षेत्रों के हितार्थ आवश्यक्तानुसार प्रकोष्ठों का गठन पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा किया जायेगा एवं प्रकोष्ठों के संयोजक एवं पदाधिकारीगण व कार्य समिति का गठन क्रमशः निम्नानुसार किया जायेगा- राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा राष्ट्रीय प्रकोष्ठ के संयोजक एवं संयोजक द्वारा अपनी कार्यकारणी व समिति का मनोयन, प्रदेश अध्यक्ष द्वारा राष्ट्रीय संयोजक की अनुशंसा पर प्रदेश प्रकोष्ठ के संयोजक एवं संयोजक द्वारा अपनी कार्यकारणी व समिति का मनोयन, जिला अध्यक्ष द्वारा प्रदेश संयोजक की अनुशंसा पर जिला प्रकोष्ठ के संयोजक एवं संयोजक द्वारा अपनी कार्यकारणी व समिति का मनोयन, मण्डल अध्यक्ष द्वारा जिला संयोजक की अनुशंसा पर मण्डल प्रकोष्ठ के संयोजक एवं संयोजक द्वारा अपनी कार्यकारणी व समिति का मनोयन किया जायेगा। 
(3) मोर्चो एवं प्रकोष्ठों के द्वारा चंदा या धनराशि संग्रह के लिए अहिंसावादी पार्टी कि रसीदों प्रयोग किया जायेगा जिस धनराशि का ब्यौरा लेखा- जोखा पृथक रूप से रखा जायेगा लेकिन राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं प्रदेशों के अध्यक्ष व संयोजको कि अनुशंसा पर पूर्व विचारनानुसार मोर्चो एवं प्रकोष्ठों के कार्य प्रायोजन के हितार्थ व्यय किये जायेंगे।
विविध
(क) कोई भी व्यक्ति किन्ही भी दो समानान्तर कमेटियों का सदस्य नहीं हो सकेगा।
(ख) कोई भी कमेटी अपने से छोटी कमेटी या किसी व्यक्ति को अपने कोई भी अधिकार सौंप सकेगी।
(ग) पार्टी के सभी कार्यों का आधार गत जनगणना के जनसंख्या संबंधित उपलब्ध आंकडे होंगे।
(घ) जहां पर भिन्नांकों के मूल्य का प्रश्न उठे वहां आधे तथा उससे अधिक को एक और आधे से कम को शून्य माना जायेगा।
(ड) इस संविधान में जहां कहीं भी मत या इसका भावबोधक कोई शब्द आया है वहां उसका तात्पर्य वैध मत से ही है।
(च) ब्लाक, जिला और प्रदेश कमेटियाँ अपने सदस्यों में से अध्यक्षों, उपाध्यक्षों और कोषाध्यक्षों एवं कार्यकारिणियों के सदस्यों को चुनेंगी तथा संबंधित कमेटियों के अध्यक्ष कार्यकारिणियों के सदस्यों में से अपने मंत्रियों की नियुक्ति करेंगे। 
(छ) इस संविधान के अन्तर्गत प्रावधानों, विषयवस्तु, व्याख्याओं अथवा कार्यविधियों से संबंधित किन्हीं सदस्यों के बीच और सदस्यों और कमेटियों के बीच अथवा आपस में किन्ही कमेटियों के बीच उठने वाले प्रश्नों या विवादों का इस संविधान द्वारा इंगित उपयुक्त अधिकारी फैसला करेंगे और ऐसे अधिकारी का फैसला अंतिम होगा और अहिंसावादी पार्टी के सभी सदस्य और कमेटियाँ इस फैसले को मानने के लिए बाध्य होंगी और इनमें से कोई भी उसके विरुद्ध अदालती कार्यवाही न कर सकेगी।
(ज) यदि कोई सदस्य किसी पार्टी कमेटी की लगातार तीन बैठकों में पूर्व सूचना दिये बगैर गैरहाजिर रहेगा तो संबंधित कमेटी से उसकी सदस्यता समाप्त हो जायेगी।